मध्य प्रदेश में आम जनता की जेब पर एक बार फिर बोझ बढ़ने वाला है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया बिजली टैरिफ जारी कर दिया है, जिसमें औसतन 4.80 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के करीब 1.90 करोड़ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जिनके बिजली बिल अब पहले से ज्यादा आएंगे।
नए टैरिफ के मुताबिक घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दर लगभग 7.05 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है। महंगाई के दौर में यह बढ़ोतरी आम लोगों के मासिक बजट को प्रभावित कर सकती है, खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह चिंता का विषय बन सकती है।
दूसरे राज्यों को सस्ती बिजली, प्रदेश में महंगी उठे सवाल
आयोग के दस्तावेजों में सामने आया है कि जहां प्रदेश के उपभोक्ताओं को करीब 7.05 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलेगी, वहीं अन्य राज्यों को यही बिजली लगभग 3.81 रुपये प्रति यूनिट की दर से उपलब्ध कराई जाएगी। यानी स्थानीय उपभोक्ताओं को बाहरी राज्यों की तुलना में करीब 3 रुपये प्रति यूनिट ज्यादा भुगतान करना होगा।
इस अंतर को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर प्रदेश के नागरिकों को ही ज्यादा कीमत क्यों चुकानी पड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली उत्पादन लागत, ट्रांसमिशन खर्च और सब्सिडी नीति जैसे कई कारण इसके पीछे हो सकते हैं। हालांकि आम जनता के बीच इस फैसले को लेकर असंतोष बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।







