आलीराजपुर की धरती आज कांप उठी लेकिन डर से नहीं, इंसाफ की गूंज से। सात साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले दरिंदे रामसिंह तेरसिंह दुडवा को अदालत ने वो सजा सुनाई, जिसकी मांग हर ज़मीरदार दिल कर रहा था। 43 दिन, सिर्फ 43 दिन में कानून ने अपना जवाब दे दिया। कोई रहम नहीं, कोई बहाना नहीं। सीधे शब्दों में फांसी।
राजकोट की विशेष अदालत ने शनिवार को साफ कर दिया कि मासूमियत पर हमला करने वालों के लिए इस देश में कोई जगह नहीं। मध्यप्रदेश के आलीराजपुर का रहने वाला 30 वर्षीय आरोपी खुद को बचाने के तमाम दांव आजमाता रहा, लेकिन सच के सामने उसकी हर चाल ढह गई। अदालत ने कहा यह अपराध “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” है, और ऐसे अपराधियों के लिए समाज में सांस लेने का हक भी सवाल बन जाता है।
यह फैसला सिर्फ एक सजा नहीं, एक चेतावनी है। उन तमाम दरिंदों के लिए जो सोचते हैं कि मासूम कमजोर हैं, कानून अंधा है, और वे बच निकलेंगे। आज अदालत ने ताना मारकर कहा देखो, इंसाफ अंधा नहीं, बेधड़क है।
मासूम की खामोशी का जवाब आज कानून ने चीखकर दिया है। 43 दिन बाद आया यह फैसला इतिहास में दर्ज होगा—कि जब दरिंदगी हदें पार करे, तो इंसाफ भी सीमा तोड़ता है।







