बालाघाट के लिए आज का दिन बेहद भावुक और गर्व से भरा रहा। असम के नागांव जिले स्थित सीआरपीएफ की 34वीं बटालियन में हुई गोलीबारी में शहीद हुए हेड कांस्टेबल विष्णु प्रसाद बघेल का पार्थिव शरीर उनके गृहग्राम पहुंचा। जैसे ही तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, पूरा माहौल गम में डूब गया। हर तरफ एक ही नारा गूंजता रहा—”जब तक सूरज-चांद रहेगा, विष्णु तेरा नाम रहेगा।” परिजनों की आंखों में आंसू थे, लेकिन अपने वीर सपूत पर गर्व भी साफ दिखाई दे रहा था।
जानकारी के मुताबिक, 4 अगस्त की सुबह असम के नागांव जिले के कटिमारी स्थित सीआरपीएफ कैंप में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आंध्र प्रदेश निवासी एएसआई बल्लानी प्रेमाबरम ने गार्ड रूम से इंसास राइफल उठाकर बैरक और क्वार्टर गार्ड की ओर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में हेड कांस्टेबल विष्णु प्रसाद बघेल और एसआई रामनवाल सिंह यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी जान नहीं बच सकी। घटना के बाद आरोपी एएसआई ने खुद को भी गोली मार ली, जबकि एक अन्य जवान घायल हो गया।
बताया जा रहा है कि विष्णु प्रसाद बघेल के पेट में गोली लगी थी। हाल ही में पदोन्नति मिलने के बाद उनका तबादला भोपाल की 107वीं बटालियन से असम की 34वीं बटालियन में हुआ था। परिवार को उम्मीद थी कि पदोन्नति के बाद उनका भविष्य और उज्ज्वल होगा, लेकिन देश सेवा करते हुए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दे दिया।
आज उनके गृहग्राम में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रशासन, पुलिस, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने पहुंचे हैं। देश हमेशा हेड कांस्टेबल विष्णु प्रसाद बघेल के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान को याद रखेगा। उनके बलिदान को पूरा देश सलाम करता है।







