16 मार्च 2025 की सुबह करीब 4 बजे पंजाब के जालंधर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर नवदीप सिंह संधू के घर की बालकनी में ग्रेनेड फेंका गया। इस हमले ने पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी के नेटवर्क को फिर चर्चा में ला दिया। पंजाब पुलिस और NIA ने मामले में हार्दिक कंबोज नाम के युवक को गिरफ्तार किया, जबकि हमले की जिम्मेदारी शहजाद भट्टी ने ली।
लेकिन सवाल सिर्फ एक ग्रेनेड हमले का नहीं है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठकर शहजाद भारत में युवाओं को अपने नेटवर्क से जोड़ने और अलग-अलग आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश करता रहा है। उसका तरीका बेहद सुनियोजित बताया जाता है—पहले भारत में संपर्क तलाशना, फिर स्थानीय लोगों के जरिए नेटवर्क बनाना, युवाओं को लालच या दबाव में जोड़ना और आखिर में अपने इशारे पर वारदात करवाना।
17 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया कि भारत में शहजाद का नेटवर्क खत्म कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। लेकिन पाकिस्तान में बैठे उसके मुख्य संचालकों और बचे हुए संपर्कों को लेकर खतरा पूरी तरह खत्म हुआ या नहीं, यही सबसे बड़ा सवाल है।
शहजाद की कहानी बताती है कि सीमा पार बैठे अपराधी किस तरह सोशल मीडिया, स्थानीय संपर्कों और लालच के जरिए भारत में अपना नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर सकते हैं। अब चुनौती सिर्फ पुराने नेटवर्क को तोड़ने की नहीं, बल्कि उसके दोबारा सक्रिय होने की किसी भी कोशिश को समय रहते रोकने की है।
यानी भारत में नेटवर्क खत्म होने का दावा भले ही सामने आ गया हो, लेकिन पाकिस्तान में बैठे उसके मास्टरमाइंड पर नजर बनाए रखना सुरक्षा एजेंसियों के लिए अभी भी बड़ी चुनौती है।







