बजट 2026: युवाशक्ति के नाम एक बड़ा दांव
लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया कि सरकार की नजर अब सीधे भविष्य पर है। उन्होंने बजट को ‘युवाशक्ति’ से प्रेरित बताते हुए कहा कि आने वाला वित्त वर्ष भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाला होगा। तीन बड़े कर्तव्यों पर आधारित इस बजट को सरकार के आर्थिक रोडमैप का मजबूत स्तंभ माना जा रहा है।
जैसे ही बजट भाषण शुरू हुआ, टैक्सपेयर्स से लेकर उद्योग जगत और शेयर बाजार तक, हर किसी की नजरें एक-एक घोषणा पर टिकी रहीं। सवाल यही था क्या यह बजट रफ्तार बढ़ाएगा या उम्मीदों पर खरा उतरेगा?
इंफ्रा से चिप तक: विकास की नई कहानी
सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर अब तक का बड़ा भरोसा जताया है। अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है, जो पिछले साल से कहीं ज्यादा है। इसका सीधा असर सड़कों, रेलवे और औद्योगिक ढांचे पर दिखने वाला है।
रेल नेटवर्क को मजबूती देने के लिए पश्चिम बंगाल के डानकुनी तक एक नए मालगाड़ी फ्रेट कॉरिडोर का ऐलान किया गया है। इससे लॉजिस्टिक्स तेज होगा और कारोबार को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
खनिज संपन्न राज्यों के लिए भी बजट में खास संदेश है। केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए विशेष कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जिससे रणनीतिक मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा सहारा मिलेगा।
टेक्सटाइल सेक्टर को दोबारा चमकाने के लिए देश में बड़े टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाएंगे। इससे रोजगार के साथ-साथ निर्यात को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
दवाइयों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए 10,000 करोड़ रुपए के निवेश से ‘बायो-फार्मा शक्ति’ योजना शुरू की जाएगी। इसके तहत तीन नए संस्थान खोले जाएंगे, जो भारत को फार्मा हब बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर भी सरकार ने बड़ा दांव खेला है। भारत सेमीकंडक्टर मिशन ISM 2.0 लॉन्च करेगा, जिससे देश में चिप मैन्युफैक्चरिंग को नई उड़ान मिलेगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को मजबूती देने के लिए मोबाइल और अन्य उपकरणों के कलपुर्जे बनाने का बजट बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ को और धार देगा।
सरकार ने साफ किया कि उसका फोकस छह बड़े क्षेत्रों पर रहेगा रणनीतिक मैन्युफैक्चरिंग, पुराने उद्योगों का पुनरुद्धार, MSME को ग्लोबल चैंपियन बनाना, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक सुरक्षा और शहरों का विकास।
बजट के पीछे सरकार का तीन विजन भी सामने आया रफ्तार, क्षमता और सबका साथ। यानी तेज विकास, सक्षम नागरिक और हर वर्ग तक अवसर।
अंत में सरकार ने अपनी उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड भी रखा। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मैन्युफैक्चरिंग और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ी है, अर्थव्यवस्था 7% की रफ्तार से आगे बढ़ रही है और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत ‘विकसित भारत’ की ओर कदम बढ़ा रहा है।
यह बजट सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि आने वाले दशक की कहानी लिखने की कोशिश माना जा रहा है।







