18 साल पुराने अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पेशल कोर्ट के निर्णय को पूरी तरह बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी की सजा और 11 दोषियों की उम्रकैद को सही ठहराते हुए दोषियों की सभी अपीलें खारिज कर दी हैं।
यह फैसला जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस समीर दवे की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत ने कहा कि यह मामला देश की सुरक्षा और मानवता पर सुनियोजित हमला था। जांच और सबूतों के आधार पर निचली अदालत का फैसला पूरी तरह उचित है।
गौरतलब है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर 70 मिनट के भीतर हुए 21 सिलसिलेवार बम धमाकों से दहल उठा था। इन धमाकों में 56 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। जांच में प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के सदस्यों की भूमिका सामने आई थी।
हाईकोर्ट ने सिर्फ सजा को बरकरार नहीं रखा, बल्कि पीड़ित परिवारों के लिए राहत का भी बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने गुजरात सरकार को निर्देश दिया है कि 56 मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये और 200 से अधिक घायलों को 1-1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। यह पूरी राशि 30 मार्च 2027 तक वितरित करने का आदेश दिया गया है।
करीब दो दशक तक चली इस कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले को देश के सबसे बड़े आतंकी मामलों में न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। अब इस फैसले पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं कि आगे कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।






