मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक ऐसी दर्दनाक तस्वीर सामने आई है, जिसने विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनगवां विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत नदना, डिहिया में सड़क नहीं होने की कीमत एक आदिवासी महिला को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
जानकारी के मुताबिक, रामकली रावत पर आकाशीय बिजली गिर गई। हादसे के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन गांव से मुख्य सड़क तक जाने का कोई पक्का रास्ता नहीं था। मजबूरी में ग्रामीणों ने रामकली को खाट पर लिटाया और करीब दो किलोमीटर तक कीचड़ और ऊबड़-खाबड़ रास्ते से कंधों पर उठाकर ले गए।
बताया जा रहा है कि अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के कारण रास्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें ग्रामीण जान जोखिम में डालकर महिला को खाट पर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य इलाके की बदहाल सड़क व्यवस्था की सच्चाई बयां कर रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव तक सड़क निर्माण की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी थी, लेकिन आज तक सड़क नहीं बन सकी। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़क बन जाती, तो शायद रामकली की जान बचाई जा सकती थी।
अब इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर कब तक दूरदराज़ गांवों के लोग बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अपनी जान गंवाते रहेंगे? क्या इस दर्दनाक घटना के बाद जिम्मेदार विभाग जागेगा, या फिर यह मामला भी केवल जांच और आश्वासनों तक सीमित रह जाएगा? फिलहाल, इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि विकास का वास्तविक अर्थ तभी है, जब उसकी पहुंच अंतिम व्यक्ति तक हो।







