मध्यप्रदेश के पवित्र धाम अमरकंटक से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मां नर्मदा के करोड़ों श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है। मां नर्मदा के उद्गम स्थल स्थित उद्गम मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि मंदिर में वर्षों से चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मंदिर ट्रस्ट और पुलिस के बयानों में बड़ा विरोधाभास सामने आया है। ट्रस्ट का दावा है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के जेवर अमरकंटक थाने में सुरक्षित रखे जाते हैं और इसकी रसीद भी ट्रस्ट के पास मौजूद है। लेकिन जब इस बारे में थाना प्रभारी से सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ कहा कि उनके थाने में मंदिर का कोई भी सोना-चांदी या चढ़ावा जमा नहीं कराया जाता।
यहीं से पूरा मामला और अधिक गंभीर हो जाता है। आखिर अगर जेवर थाने में नहीं हैं, तो वे कहाँ हैं? उनका रिकॉर्ड किसके पास है? और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है? इन सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास स्पष्ट रूप से नहीं हैं।
जानकारी के अनुसार, श्री नर्मदा मंदिर उद्गम ट्रस्ट का गठन वर्ष 2001 में मंदिर के संचालन, निर्माण कार्य, दानपेटियों की राशि और चढ़ावे में मिलने वाले सोने-चांदी के प्रबंधन के लिए किया गया था। लेकिन अब सामने आया है कि स्थानीय नगर परिषद के पास ट्रस्ट का बायलॉज तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में दान की गिनती, कीमती आभूषणों के संरक्षण और उनके रखरखाव की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि मां नर्मदा के मंदिर में चढ़ाया गया हर दान आस्था का प्रतीक है और उसकी पारदर्शी व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों पर टिकी हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कब होगी और आखिर मंदिर के सोने-चांदी का सच क्या है।
फिलहाल यह मामला लगातार चर्चा में है और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।







