अयोध्या के श्रीराम मंदिर को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। इस बार मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े दान और उसकी पारदर्शिता का है। सिंधी समाज ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए 200 किलो चांदी दान की थी, लेकिन आज तक उसकी आधिकारिक रसीद नहीं मिली। इतना ही नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि उस चांदी का इस्तेमाल आखिर हुआ कहां।
मुंबई के विश्व सिंधी सेवा संगम का कहना है कि उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को 200 किलो चांदी सौंपी थी। यह चांदी मंदिर में लगने वाली विशेष शिलाओं के लिए दी गई थी। संगठन का आरोप है कि कई बार जानकारी मांगने के बावजूद न तो रसीद दी गई और न ही चांदी के उपयोग का कोई आधिकारिक विवरण सामने आया।
मामले को और गंभीर बनाते हुए एक महिला श्रद्धालु ने भी आरोप लगाया है कि उन्होंने भगवान राम मंदिर के लिए चांदी से बनी काकभुशुंडि की प्रतिमा दान की थी, लेकिन उसकी भी कोई रसीद नहीं दी गई। महिला का कहना है कि प्रतिमा अब कहां है, इसकी भी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
इधर, श्रीराम जन्मभूमि परिसर में बने शेषावतार मंदिर के ध्वजारोहण कार्यक्रम में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव की सक्रिय मौजूदगी ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि हाल ही में उठे चढ़ावा विवाद में इन पदाधिकारियों को जल्द क्लीनचिट मिल सकती है।
हालांकि, इन आरोपों पर मंदिर ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। फिलहाल सवाल यही है कि श्रद्धालुओं के दान का पूरा हिसाब कब सामने आएगा और विवादों पर आखिर कब विराम लगेगा। अब देखना होगा कि इन आरोपों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट क्या जवाब देता है और क्या दान से जुड़े सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाते हैं या नहीं।







