मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में वन विभाग ने एक बड़े वन्यजीव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि इन तस्करों तक पहुंचने के लिए वन विभाग की टीम ने खुद खरीददार बनकर जाल बिछाया और पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया।
जानकारी के मुताबिक, पिछले डेढ़ महीने से विभाग को सूचना मिल रही थी कि कुछ लोग बाघ के अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त में लगे हुए हैं। सूचना की पुष्टि के बाद वन विभाग की टीम ने फर्जी ग्राहक बनकर आरोपियों से संपर्क किया और सौदा तय किया। जैसे ही तस्कर हड्डियों के साथ मौके पर पहुंचे, टीम ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
अधिकारियों का दावा है कि जब्त की गई हड्डियां दो अलग-अलग बाघों के कंकालों की हो सकती हैं। हालांकि इसकी वैज्ञानिक पुष्टि के लिए नमूनों को फॉरेंसिक जांच और वन्यजीव प्रयोगशाला भेजा गया है।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि एक बाघ की हड्डियां मंडला जिले के बम्हनी बंजर क्षेत्र से लाई गई थीं। अब वन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि इन बाघों का शिकार कब और कैसे किया गया, तथा इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
वन विभाग का मानना है कि यह कार्रवाई वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और कई अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है।
कैमरे पर कैद इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बाघों और वन्यजीवों के दुश्मनों पर अब शिकंजा कसता जा रहा है।
फिलहाल इस मामले में आगे की जांच जारी है।







