लखनऊ के दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद हर तरफ सिर्फ चीखें, आंसू और मातम दिखाई दे रहा है। पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर का दृश्य इतना दर्दनाक था कि वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे में जान गंवाने वाले कई छात्रों और कर्मचारियों ने आग में फंसने के बाद अपने घरवालों को आखिरी बार फोन किया था। किसी ने कहा, “यहां आग लग गई है, हमें बचा लो…” तो किसी ने रोते हुए मदद की गुहार लगाई। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
मृतक नीलेश का शव जैसे ही उनके पिता ने देखा, वे वहीं बेहोश होकर गिर पड़े। बहन अपने भाई के शव से लिपटकर चीख-चीखकर रोती रही और बार-बार कहती रही, “मेरा भाई वापस आ जाओ…” यह दृश्य हर किसी का दिल दहला देने वाला था।
पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश से पहुंचे परिजनों का दर्द भी कम नहीं था। अपनी बेटियों के शव देखकर कई माताएं बेसुध हो गईं। अस्पताल और पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर सिर्फ सिसकियां और आंसुओं का सैलाब नजर आया।
करीब सात घंटे तक चले पोस्टमॉर्टम के दौरान 15 शवों की जांच पूरी की गई। लेकिन इस हादसे ने कई परिवारों के सपनों, उम्मीदों और खुशियों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस भयावह हादसे का जिम्मेदार कौन है? और उन परिवारों को इंसाफ कब मिलेगा, जिन्होंने एक ही दिन में अपना सब कुछ खो दिया।







