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कर्ज के सहारे विकास या बढ़ता आर्थिक बोझ?, 5 लाख करोड़ पार देनदारी, फिर बाजार से उधार

मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर बाजार से 2800 करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है। वित्त विभाग ने राज्य विकास ऋण यानी एसजीएस बॉन्ड के जरिए यह राशि जुटाने की अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार दो चरणों में 1600 करोड़ और 1200 करोड़ रुपए के बॉन्ड जारी करेगी।

जानकारी के मुताबिक 1600 करोड़ रुपए का ऋण 8 साल की अवधि के लिए लिया जाएगा। इस पर 7.64 प्रतिशत ब्याज दर लागू होगी। सरकार को इस कर्ज पर हर साल अप्रैल और अक्टूबर में ब्याज का भुगतान करना होगा।

सबसे बड़ी बात यह है कि इस नए कर्ज के बाद चालू वित्त वर्ष में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 13 हजार 800 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। वहीं प्रदेश पर कुल देनदारी बढ़कर 5 लाख 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा होने का अनुमान है।

सरकार का कहना है कि यह राशि विकास कार्यों, अधोसंरचना परियोजनाओं और जनहित योजनाओं के लिए उपयोग की जाएगी। लेकिन विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है कि आखिर बढ़ते कर्ज का बोझ प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर कितना असर डालेगा और आने वाली पीढ़ियों को इसकी कितनी कीमत चुकानी पड़ेगी।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इस उधारी को विकास की रफ्तार बढ़ाने में कितना सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर पाती है, या फिर बढ़ता कर्ज भविष्य में नई आर्थिक चुनौतियां खड़ी करेगा।

कैमरे के पीछे से पूरी टीम के साथ, मैं हूँ आपका साथी। नमस्कार।

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