पटना से सटे इलाके में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है। परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
भरत तिवारी की बहन का आरोप है कि उसके भाई को पुलिस ने पांच गोलियां मारीं। उनका कहना है कि गोली शरीर के संवेदनशील हिस्सों में भी लगी और फायरिंग बेहद करीब से की गई। परिवार का दावा है कि पुलिस ने पहले भरोसा दिलाया था कि उनकी सभी मांगें मानी जाएंगी। आरोप है कि इसी भरोसे के बाद भरत ने अपना हथियार छोड़ दिया, लेकिन इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई।
बहन ने यह भी दावा किया कि पटना के अस्पताल में डॉक्टरों से उन्हें जानकारी मिली कि भरत को इलाज के लिए लाने के बाद उचित चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। परिवार का आरोप है कि घायल अवस्था में उसे गंभीरता से नहीं देखा गया और समय पर उपचार नहीं मिला।
वहीं भरत के पिता काशीनाथ तिवारी का दर्द भी छलक पड़ा। उन्होंने कहा कि बेटे के एनकाउंटर के बाद भी पुलिस ने उन्हें घंटों थाने में बैठाए रखा। इस वजह से वे अपने बेटे को अंतिम बार देख भी नहीं सके। पिता का कहना है कि परिवार आज भी यह समझ नहीं पा रहा कि आखिर उनके बेटे के साथ क्या हुआ और पूरी सच्चाई सामने क्यों नहीं आ रही।
उधर गांव में भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। परिवार और स्थानीय लोग लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की अपेक्षा जता रहे हैं।
फिलहाल एनकाउंटर को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक तरफ पुलिस अपनी कार्रवाई को सही बता रही है, तो दूसरी तरफ परिवार इसे सुनियोजित कार्रवाई बताते हुए न्याय की गुहार लगा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सच सामने आता है और भरत तिवारी एनकाउंटर की गुत्थी आखिर कब सुलझती है।







