सीहोर जिले के आष्टा की एक ऐसी वारदात, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। तेरहवीं के कार्यक्रम के बीच एक बहू की मौत हुई, जिसे पहले सामान्य घटना मानने की कोशिश हुई, लेकिन दो मासूम बच्चों की गवाही ने ऐसा सच सामने ला दिया कि छह सगी बहनों को उम्रकैद की सजा हो गई।
मामला इंदिरा कॉलोनी का है। घर में पिता की तेरहवीं का कार्यक्रम चल रहा था। रिश्तेदारों का आना-जाना लगा हुआ था। इसी दौरान घर की बहू सुनीता और उसकी छह ननदों के बीच किसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया।
बताया जाता है कि माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि घर के अंदर चीख-पुकार सुनाई देने लगी। इसी बीच सुनीता के दोनों बच्चों, सचिन और अंजली को बहाने से दुकान भेज दिया गया। जब बच्चे वापस लौटे तो घर का माहौल बदला हुआ था। अफरा-तफरी मची थी और उनकी मां अचेत अवस्था में पड़ी थी।
सुनीता को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शुरुआत में मौत को सामान्य बताने की कोशिश हुई, लेकिन पुलिस को कुछ बातें संदिग्ध लगीं। जांच आगे बढ़ी तो शक की सुई घर में मौजूद छह सगी बहनों पर जाकर टिक गई।
सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब मासूम बच्चों ने अदालत में वह सच बताया जो उन्होंने घटना से पहले और बाद में देखा था। बच्चों की गवाही, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और पुलिस जांच ने मिलकर हत्या की पूरी कहानी अदालत के सामने रख दी।
अदालत ने माना कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या थी। बच्चों की सच्ची गवाही ने वह राज खोल दिया, जिसने छह ननदों को कानून के कटघरे तक पहुंचाया और आखिरकार सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। एक मां की हत्या और बच्चों की हिम्मत इस मामले ने साबित कर दिया कि सच कितना भी दबाने की कोशिश की जाए, आखिरकार सामने आ ही जाता है।







