इंदौर के अहिल्या पलटन इलाके में शुक्रवार को एक घर में शादी की खुशियां अचानक रुक गईं, जब महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर नाबालिग लड़की की शादी रुकवा दी। घर में शादी की पूरी तैयारियां हो चुकी थीं मंडप सजा था, दुल्हन को हल्दी लगाई जा रही थी और महिलाएं पारंपरिक गीत गा रही थीं। इसी बीच विभाग की टीम ने हस्तक्षेप किया और जांच शुरू की।
परिजनों ने शुरुआत में यह दलील दी कि उनके समाज में 16 साल की उम्र में विवाह की अनुमति है, लेकिन जब अधिकारियों ने इस दावे के समर्थन में कोई कानूनी दस्तावेज मांगा तो वे कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। जांच में स्पष्ट हुआ कि लड़की की उम्र अभी 18 वर्ष पूरी होने में करीब छह महीने बाकी है।
टीम में शामिल परियोजना अधिकारी चित्रा यादव, उड़नदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक, सदस्य संगीता सिंह और चाइल्ड लाइन के फूल सिंह कारपेंटर ने दोनों परिवारों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों, संभावित सजा और कम उम्र में विवाह के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि बाल विवाह न केवल अवैध है बल्कि इससे बालिका के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
काफी देर तक चली समझाइश और चर्चा के बाद आखिरकार दोनों पक्ष शादी टालने के लिए तैयार हो गए। इस कार्रवाई को प्रशासन की सतर्कता और सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो यह संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई परंपरा नहीं हो सकती।







