इंदौर के बंगाली चौराहा स्थित ब्रजेश्वरी एनएक्स में हुए भीषण अग्निकांड ने एक परिवार की ज़िंदगी पूरी तरह बदल दी। कारोबारी मनोज पुगलिया का मकान आग की चपेट में आकर इस कदर क्षतिग्रस्त हो गया कि अब उसमें दोबारा रहना संभव नहीं रह गया है। दीवारों में पड़ी गहरी दरारें, कमजोर हो चुके पिलर और झुलसी छतें इस बात की गवाही दे रही हैं कि यह घर अब सिर्फ एक ढांचा भर रह गया है।
पुलिस ने औपचारिक प्रक्रिया पूरी करते हुए जला हुआ मकान परिवार को सौंप दिया है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह जगह अब रहने योग्य नहीं मानी जा रही। इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को बेघर किया, बल्कि शहरों में तेजी से बढ़ रहे ई-व्हीकल के उपयोग और उससे जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डीसीपी जोन-2 कुमार प्रतीक के अनुसार मामले की जांच जारी है। अब तक 18 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें प्रत्यक्षदर्शी, पड़ोसी और राहत कार्य में जुटे एनडीआरएफ के जवान शामिल हैं। बिजली विभाग ने भी अपनी प्राथमिक रिपोर्ट सौंप दी है, जबकि जली हुई कार के हिस्सों और चार्जिंग सर्किट को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
अधिकारियों का कहना है कि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। हालांकि शुरुआती संकेत इस ओर इशारा कर रहे हैं कि ई-व्हीकल चार्जिंग से जुड़ी कोई तकनीकी खामी इस हादसे की वजह हो सकती है।
यह घटना शहरी जीवनशैली में हो रहे बदलावों के साथ सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करती है। सवाल यह है कि क्या रिहायशी इलाकों में ई-व्हीकल चार्जिंग के लिए पर्याप्त दिशा-निर्देश मौजूद हैं, और यदि हैं, तो क्या उनका सही तरीके से पालन किया जा रहा है?
फिलहाल, एक परिवार अपने घर के खोने के दर्द से जूझ रहा है, और शहर एक ऐसे खतरे के प्रति सचेत हो रहा है, जिसे अब नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा है।







