मध्यप्रदेश के इंदौर के खजराना क्षेत्र में गुरुवार अलसुबह जो हुआ, उसने इंसानियत को फिर कटघरे में खड़ा कर दिया। एक युवती को फोन कर छत पर बुलाया गया मुलाकात के नाम पर जाल बिछाया गया। और जब उसने “नहीं” कहा, तो उस “नहीं” की सज़ा धक्का बनकर उसके शरीर पर गिरी। आरोपी अनिकेत उर्फ टिक्की। नाम याद रखिए। क्योंकि आरोप है कि इस युवक ने पहले युवती पर अपने साथ चलने का दबाव बनाया, फिर इंकार होते ही अपशब्दों की बौछार की, और उसके बाद हाथ उठाया। सवाल ये है क्या किसी लड़की का इंकार आज भी कुछ लोगों की मर्दानगी को ललकार देता है?
परिजनों के मुताबिक, युवती ने शोर मचाया तो घरवाले छत की ओर दौड़े। लेकिन उससे पहले ही कथित तौर पर अनिकेत ने उसे रेलिंग के पास धक्का दे दिया। संतुलन बिगड़ा… और वो पहली मंज़िल से नीचे जा गिरी। क्या ये सिर्फ धक्का था? या जान लेने की कोशिश?
घायल युवती को तुरंत निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। पिता की शिकायत पर खजराना पुलिस ने छेड़छाड़ और जान से मारने की नीयत से धक्का देने की धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपी इलाके का ही रहने वाला बताया जा रहा है लेकिन वारदात के बाद से फरार है। अब बड़ा सवाल कब तक “नहीं” को चुनौती समझा जाएगा? कब तक बेटियों को अपनी ही छत पर सुरक्षित होने की गारंटी नहीं मिलेगी? पुलिस तलाश में है। लेकिन समाज को भी तलाश करनी होगी ऐसी सोच की, जो दोस्ती के नाम पर दबाव बनाती है, और इंकार पर हिंसा पर उतर आती है। जांच जारी है… और शहर गुस्से में है।







