
इंदौर की मशहूर सराफा बाजार की संकरी गलियों में रोज दिखने वाला एक असहाय भिक्षुक, लकड़ी की फिसलने वाली गाड़ी पर बैठा, और हाथ में घिसे जूते लोगों की संवेदना बटोरता रहा। किसी ने नहीं सोचा था कि यह दृश्य एक सुनियोजित छल का हिस्सा है। लेकिन भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के तहत जब महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने इस व्यक्ति को रेस्क्यू किया, तो कहानी ने चौंकाने वाला मोड़ ले लिया।
भीख मांगने वाला यह शख्स मांगीलाल निकला और वह कोई मजबूर नहीं, बल्कि करोड़ों की संपत्ति का मालिक है। पूछताछ में सामने आया कि मांगीलाल शहर के अलग-अलग इलाकों में तीन पक्के मकानों का स्वामी है। भगत सिंह नगर में उसका तीन मंजिला मकान है, शिवनगर में एक और पक्का घर, जबकि अलवासा में एक बीएचके मकान उसे दिव्यांगता के आधार पर शासन द्वारा रेडक्रास की मदद से मिला था। यहीं नहीं, उसके पास तीन ऑटो हैं जिन्हें वह किराए पर चलवाता है और एक डिजायर कार भी है, जिसके लिए ड्राइवर तक रखा गया है।
सबसे हैरान करने वाला खुलासा सराफा क्षेत्र से जुड़ा है। मांगीलाल यहां सिर्फ भीख मांगने नहीं आता था, बल्कि व्यापारियों और लोगों को ब्याज पर पैसे देने का काम करता था। वह एक दिन और एक सप्ताह के हिसाब से रकम उधार देता और रोजाना ब्याज वसूलने सराफा पहुंचता था। खुद के मुताबिक, वह किसी पर दबाव नहीं डालता लोग उसकी हालत देखकर खुद पैसे दे देते थे। इसी सहानुभूति को उसने अपनी कमाई और सूदखोरी का जरिया बना लिया।
जिला प्रशासन द्वारा फरवरी 2024 से चलाए जा रहे भिक्षावृत्ति मुक्त अभियान में अब तक हजारों लोगों की काउंसलिंग और पुनर्वास किया जा चुका है। इसी कड़ी में मांगीलाल का मामला सामने आया, जिसने अभियान की गंभीरता और जरूरत दोनों को उजागर कर दिया।
अधिकारियों का कहना है कि भिक्षावृत्ति करने वालों के साथ-साथ इसे बढ़ावा देने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। सराफा की चमक-दमक के बीच करुणा के नाम पर चल रहे इस गुप्त आर्थिक खेल ने शहर को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हर दया का पात्र सच में मजबूर हो, यह जरूरी नहीं।








