इंदौर पुलिस की कार्रवाई ने एक ऐसे चेहरे से नकाब उतारा है, जिसने समाज को शर्मसार कर दिया है।
भोपाल का एक स्कूल प्रिंसिपल, अबान शकील… नाम सुनकर लगता है शिक्षा का प्रहरी, लेकिन हकीकत में निकला ड्रग माफिया का सक्रिय खिलाड़ी। बच्चों को संस्कार सिखाने वाला ये शख्स खुद एमडी ड्रग्स की तस्करी में डूबा हुआ था वो भी थार जैसी लग्ज़री कार में।
कनाड़िया पुलिस ने जब शिकंजा कसा, तो ये कहानी और भी ज़हरीली निकली। पूछताछ में सामने आया अंतरराज्यीय ड्रग गिरोह जिसका मास्टरमाइंड वैभव उर्फ बाबा शर्मा। क्लब, बार, पब और हाई-प्रोफाइल पार्टियों में ड्रग्स की सप्लाई… और पुलिस से बचने के लिए गिरोह में शामिल की गईं युवतियां।
यानी नशे का कारोबार, ग्लैमर के कवर में!
डीपीएस स्कूल बायपास के पास खड़ी बिना नंबर की इको स्पोर्ट…पुलिस को देखते ही भागने की कोशिश लेकिन कानून के हाथ लंबे होते हैं। कार से पकड़ा गया बाबा शर्मा, और उसके साथ दो युवतियां रिशु उर्फ नेहा और अलीशा उर्फ जैनी। कपड़ों में छुपा रखा था एमडी ड्रग्स… क्लब पार्टियों में युवाओं को महंगे दामों पर नशे की पुड़ियां बेचने का खुला कबूलनामा।
गोवा से लेकर इंदौर तक, बार और क्लब इस नेटवर्क के टारगेट थे। इवेंट कंपनी की आड़ में पार्टियां, और पार्टियों में खुलेआम नशे की सप्लाई।
सवाल ये नहीं कि ड्रग्स कहां से आई सवाल ये है कि आखिर कब तक ऐसे चेहरे समाज में खुलेआम घूमते रहेंगे? इंदौर पुलिस ने साफ संदेश दे दिया है
नशे का सौदागर चाहे कितना भी रईस क्यों न हो, कितनी भी लग्ज़री गाड़ियों में घूमता हो, कानून की नजर से बच नहीं पाएगा।
अब पुलिस रिमांड में आरोपियों से पूछताछ जारी है। कई क्लब संचालकों और सप्लाई चैन के नाम सामने आने की पूरी संभावना है। ये सिर्फ गिरफ्तारी नहीं,
ये नशे के नेटवर्क के खिलाफ जंग है।







