इंदौर की राजनीति में आज शांति नहीं, बल्कि बेचैनी है। कांग्रेस के पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी अचानक पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और भाजपा की दिग्गज नेता सुमित्रा महाजन के घर पहुंच जाते हैं। नाम दिया जाता है “सौजन्य भेंट” का, लेकिन सवाल यह है कि क्या राजनीति में अब भी कुछ सिर्फ सौजन्य भर रह गया है?
कल राहुल गांधी इंदौर आ रहे हैं और ठीक उससे पहले यह मुलाकात कोई मामूली इत्तेफाक नहीं मानी जा सकती। जिस वक्त कांग्रेस अपने संगठन को संभालने की जद्दोजहद में है, उसी वक्त भाजपा की मजबूत आवाज कही जाने वाली ताई के घर पटवारी की मौजूदगी कई सियासी दरवाज़े खटखटा रही है।
और कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ताई के घर पहुंचने से पहले जीतू पटवारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कृपाशंकर शुक्ला के निवास पर भी दस्तक देते हैं। यानी एक के बाद एक मुलाकातें, एक के बाद एक संदेश। सवाल यह है कि संदेश किसे और किस बात का?
क्या यह कांग्रेस की मजबूरी है या भाजपा के किले में सेंध लगाने की नाकाम कोशिश? या फिर यह सिर्फ कैमरों के सामने दिखाई गई एक ऐसी मुलाकात है, जिसका असली मतलब पर्दे के पीछे छुपा है?
इंदौर में आज सियासत मुस्कुरा नहीं रही, सियासत तंज कस रही है। और हर कोई पूछ रहा है, राहुल गांधी के दौरे से पहले जीतू पटवारी आखिर क्या साबित करना चाहते हैं?







