सीट बेल्ट ने बचाई डीएसपी–एएसआई की जान, वरना पुल पर लिखी जा सकती थी खून से भरी कहानी
यह हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही और नशे की शर्मनाक घटना है। चाँद थाना क्षेत्र के कुलबेहर नदी पुल पर मंगलवार को ऐसा मंजर बना, जिसने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया। शराब के नशे में धुत बोलेरो चालक ने तेज रफ्तार में पुलिस वाहन को सामने से सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों गाड़ियों का अगला हिस्सा चकनाचूर हो गया।
विडंबना देखिए—जिस चालक के हाथों में मासूम स्कूली बच्चों की जिम्मेदारी थी, वही नशे में सड़क पर मौत बांटता घूम रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शाहपुरा निवासी यह चालक बच्चों को स्कूल छोड़कर लौट रहा था और पूरी तरह नशे में था। पुल पर संतुलन खोया और सामने से आ रही पुलिस की गाड़ी को मिसाइल की तरह ठोक दिया।
सीट बेल्ट बनी ढाल, नहीं तो अफसरों की जान खतरे में थी
पुलिस वाहन में डीएसपी ललित बैरागी और एएसआई वैरागी सवार थे। गनीमत रही कि दोनों अधिकारियों ने सीट बेल्ट पहनी हुई थी। एयरबैग्स और सीट बेल्ट ने मिलकर वह कर दिखाया, जो लापरवाही नहीं कर पाई, दोनों की जान बच गई। नहीं तो यह खबर “हादसा” नहीं, “मौत” की सुर्खी बन चुकी होती।
बोलेरो चालक को मामूली चोटें आईं, लेकिन कानून की चोट अब उस पर भारी पड़ने वाली है। आरोपी को हिरासत में लेकर मेडिकल जांच कराई जा रही है और विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
जनता का सवाल, अगर बच्चों के साथ होता हादसा तो कौन जिम्मेदार?
इस घटना के बाद इलाके में गुस्सा फूट पड़ा है। लोग पूछ रहे हैं, अगर यही हादसा बच्चों को ले जाते वक्त होता तो? क्या तब भी इसे ‘दुर्घटना’ कहा जाता? नशे में वाहन चलाना अपराध है, लेकिन बच्चों को ढोते हुए नशे में गाड़ी चलाना सीधा-सीधा हत्या को न्योता देना है।
यह हादसा चेतावनी है, सीट बेल्ट चालान से बचने का नहीं, जिंदगी बचाने का हथियार है। और ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ कोई छोटी गलती नहीं, बल्कि समाज के लिए जहर है। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि अब नशे में गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ और भी सख्त अभियान चलेगा।
पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर यातायात बहाल कर दिया है, लेकिन सवाल अब भी सड़क पर खड़ा है
क्या ऐसे गैर-जिम्मेदार चालकों को बच्चों की जिम्मेदारी सौंपना अपराध नहीं?









