17 मौतें, हाईकोर्ट में सुनवाई और सड़कों पर कैंडल मार्च, हालात अब भी गंभीर
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली बीमारी का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए, जिससे स्वास्थ्य प्रशासन की चिंता और गहरा गई है। सभी मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे, जिनमें से 6 की हालत गंभीर होने पर अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया।
इस भयावह स्थिति में अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है। अस्पतालों में फिलहाल 110 मरीज भर्ती हैं, जबकि अब तक कुल 421 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। राहत की बात यह है कि इनमें से 311 मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। हालांकि, 15 मरीज अब भी आईसीयू में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए यह संकट अब कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर भी पहुंच गया है। दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर एमपी हाईकोर्ट में दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई होगी। वहीं, कांग्रेस ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए शहर के सभी 85 वार्डों में कैंडल मार्च निकालने का ऐलान किया है।
स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है। इंदौर के सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हसानी के मुताबिक,
200 टीमें घर-घर सर्वे कर रही हैं। अब तक 2,745 घरों में सर्वे कर करीब 14 हजार लोगों से संपर्क किया जा चुका है। प्रभावित इलाकों में 5 एम्बुलेंस तैनात की गई हैं, जबकि एमवाय अस्पताल, अरबिंदो अस्पताल और चाचा नेहरू अस्पताल में डॉक्टरों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है।
सवाल अब भी बरकरार है
क्या प्रशासन समय रहते इस संकट पर काबू पा पाएगा, या इंदौर में दूषित पानी और जानें लेता रहेगा?







