दतिया उपचुनाव में बीजेपी का सबसे बड़ा राजनीतिक सरप्राइज सामने आया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, जिनका नाम लगभग तय माना जा रहा था, उनका टिकट ऐन वक्त पर काट दिया गया। उनकी जगह पार्टी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर सभी को चौंका दिया। सवाल उठ रहा है कि आखिर अमित शाह के करीबी माने जाने वाले नरोत्तम मिश्रा का टिकट क्यों कटा? आइए जानते हैं इस फैसले के पीछे की पूरी कहानी।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले करीब चार महीने से डॉ. नरोत्तम मिश्रा दतिया उपचुनाव की तैयारी में जुटे हुए थे। 6 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद प्रदेश भाजपा ने केंद्रीय नेतृत्व को दतिया सीट के लिए नरोत्तम मिश्रा का सिंगल नाम भेजा था। माना जा रहा था कि टिकट पर सिर्फ औपचारिक मुहर लगना बाकी है।
लेकिन दिल्ली में हुए अंतिम फीडबैक और चुनावी आकलन ने पूरा समीकरण बदल दिया। सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व को मिले इनपुट में नरोत्तम मिश्रा की स्थिति अपेक्षा के अनुरूप मजबूत नहीं पाई गई। इसके बाद सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाने के साथ-साथ स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने नया चेहरा मैदान में उतारने का फैसला किया।
बीजेपी ने पूर्व संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया। संगठन में लंबे समय तक काम करने वाले आशुतोष तिवारी को पार्टी ने ऐसा उम्मीदवार माना, जो स्थानीय कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के साथ चुनावी मुकाबले में बेहतर तालमेल बना सकें।
हालांकि टिकट कटने के बाद दतिया में कुछ कार्यकर्ताओं की नाराजगी जरूर सामने आई। विरोध प्रदर्शन भी हुए, लेकिन खुद डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी के फैसले को स्वीकार करते हुए कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखने और सड़क पर विरोध न करने की अपील की। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी का निर्णय सर्वोपरि है और अपनी बात पार्टी के मंच पर ही रखी जानी चाहिए।
दतिया उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बीजेपी की रणनीति, संगठन और नेतृत्व के फैसलों की बड़ी परीक्षा बन गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आशुतोष तिवारी पार्टी के इस फैसले को जीत में बदल पाएंगे, या फिर टिकट बदलने का फैसला चुनावी बहस का सबसे बड़ा मुद्दा बन जाएगा।







