मथुरा के वृंदावन में यमुना नदी में हुए दर्दनाक नाव हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। केसी घाट के पास शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे 37 श्रद्धालुओं से भरी नाव अचानक पलट गई, जिसमें अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 22 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 5 लोग अभी भी लापता हैं।
शनिवार को दूसरे दिन भी बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आर्मी समेत लगभग 250 रेस्क्यू कर्मी 14 किलोमीटर के दायरे में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार यमुना का तेज बहाव और नदी में मौजूद गहरी गाद व रेत तलाशी अभियान को मुश्किल बना रहे हैं। आशंका है कि शव कीचड़ में दबे हो सकते हैं या बहकर काफी दूर चले गए हों।
तेज बहाव और सुरक्षा लापरवाही बनी हादसे की वजह
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे के समय नाव की क्षमता 40 यात्रियों की थी, लेकिन उसमें भारी संख्या में श्रद्धालु सवार थे। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि किसी भी यात्री को लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं कराई गई थी। 25 फीट गहरे पानी में नाव असंतुलित होकर पलट गई।
हादसे में एक ही परिवार के 7 सदस्यों सहित कई रिश्तेदारों की मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। स्थानीय नाविकों और पांटून पुल की मरम्मत कर रहे लोगों ने शुरुआती बचाव कार्य में मदद की, जिसके बाद प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंचीं और बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।







