खंडवा के पुनासा इलाके से ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर गुस्सा भी आता है और शर्म भी। एक 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला, जो अपने खेत की छोटी सी टपरी में अकेली रहती थी, दरिंदों की हैवानियत का शिकार बन गई। चार नकाबपोश बदमाश रात के अंधेरे में आए और उस बुजुर्ग महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर इंसानियत को शर्मसार कर दिया।
दरिंदों ने महिला के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया ताकि उसकी आवाज किसी तक न पहुंच सके। इसके बाद बारी-बारी से उसकी अस्मिता को रौंदा और उसे खून से लथपथ हालत में वहीं छोड़कर फरार हो गए। सोचिए… 90 साल की एक कमजोर बुजुर्ग महिला, जो मुश्किल से चल-फिर पाती होगी, वह करीब 12 घंटे तक दर्द से कराहती हुई उसी खटिया पर पड़ी रही… और आसपास की दुनिया को कुछ पता तक नहीं चला।
सुबह जब कुछ लोग भूसा खरीदने के लिए खेत पहुंचे तो उन्होंने जो मंजर देखा, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था। खटिया खून से सनी हुई थी और बुजुर्ग महिला बेसुध हालत में पड़ी थी। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया।
लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि यह अपराध किसने किया… सवाल यह है कि आखिर हमारे समाज में इंसानियत बची भी है या नहीं? जिस उम्र में एक महिला को सम्मान, सहारा और सुरक्षा मिलनी चाहिए, उस उम्र में उसके साथ ऐसी दरिंदगी! क्या ऐसे दरिंदों को कानून का डर बिल्कुल भी नहीं रहा?
पुलिस का कहना है कि महिला का इलाज अस्पताल में चल रहा है और बयान दर्ज कराने के लिए महिला अधिकारी को भेजा गया है। फिलहाल पीड़िता बयान देने की हालत में नहीं है। लेकिन सच तो यह है कि बयान का इंतजार सिर्फ पुलिस को है… समाज को तो इंसाफ का इंतजार है।
अब देखना यह है कि पुलिस इन नकाबपोश हैवानों तक कितनी जल्दी पहुंचती है… या फिर यह मामला भी फाइलों की धूल में दबकर रह जाएगा। क्योंकि अगर 90 साल की दादी भी इस समाज में सुरक्षित नहीं हैं… तो फिर आखिर सुरक्षित कौन है?







