विकास की बड़ी परियोजनाएं अक्सर खुशहाली की तस्वीर दिखाती हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के सागर जिले का एक गांव ऐसी कीमत चुका रहा है, जिसकी चर्चा शायद आंकड़ों में नहीं होती। यहां सिर्फ घर और खेत नहीं डूब रहे, बल्कि युवाओं के सपने और परिवारों की उम्मीदें भी पानी में समाती नजर आ रही हैं।
यह है सलैया खुर्द गांव। धसान नदी पर बन रहे उल्दन बांध की डूब में आने वाला यह गांव आज एक अनोखी सामाजिक त्रासदी झेल रहा है। पिछले चार साल से यहां से एक भी बारात नहीं निकली। गांव के 40 घरों में 15 से ज्यादा युवक शादी की उम्र पार कर चुके हैं, लेकिन उनके रिश्ते नहीं हो पा रहे।
गांव वाले बताते हैं कि रिश्ते लेकर लोग आते हैं, बातचीत भी आगे बढ़ती है, लेकिन जैसे ही पता चलता है कि गांव डूब क्षेत्र में है और जल्द ही पूरी बस्ती खाली करनी पड़ेगी, लोग रिश्ता तोड़ देते हैं। उनका सीधा सवाल होता है जब भविष्य ही अनिश्चित है तो बेटी को यहां क्यों भेजें? “लोग कहते हैं कि बेटी को बेघर होने के लिए नहीं ब्याहेंगे। इसी वजह से हमारे लड़कों की शादी नहीं हो पा रही।”
उल्दन बांध परियोजना से हजारों हेक्टेयर जमीन को सिंचाई मिलेगी और सैकड़ों गांवों तक पानी पहुंचेगा। लेकिन सलैया खुर्द के लोगों का कहना है कि विकास की इस कीमत ने उनके सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर दिया है। माता-पिता अपने बेटों की शादी को लेकर सबसे ज्यादा परेशान हैं।
गांव के लोग अब सिर्फ नए घर या मुआवजे का इंतजार नहीं कर रहे, बल्कि उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब उनके आंगन में फिर से शहनाई बजेगी और गांव से एक बार फिर बारात निकलेगी।
सलैया खुर्द की कहानी बताती है कि विस्थापन केवल जमीन और मकान का नहीं होता, बल्कि यह लोगों के रिश्तों, सपनों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी गहराई से प्रभावित करता है। कैमरा पर्सन के साथ… [रिपोर्ट]।







