मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू करने की तैयारी अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकेतों के बाद माना जा रहा है कि आगामी मानसून सत्र में यह ऐतिहासिक विधेयक विधानसभा में पेश किया जा सकता है।
यूसीसी का सबसे चर्चित प्रावधान लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीयन है। यदि कोई जोड़ा लिव-इन में रहता है, तो उसे कानूनी रूप से पंजीकृत कराना होगा। इससे ऐसे संबंधों में जन्म लेने वाले बच्चों को संपत्ति और वारिसाना हक मिलने का रास्ता साफ होगा।
सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। समिति प्रदेशभर में जनसंवाद कर रही है और जनता से ऑनलाइन सुझाव भी ले रही है।
प्रस्तावित कानून चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है विवाह, तलाक और भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं संपत्ति, तथा लिव-इन संबंध। सरकार का दावा है कि इससे अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण पैदा होने वाली कानूनी जटिलताएं खत्म होंगी और सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू होंगे।
हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि क्या समाज लिव-इन संबंधों के पंजीयन और उससे जुड़े अधिकारों को सहजता से स्वीकार करेगा। वहीं समर्थकों का कहना है कि यह कदम सामाजिक न्याय और कानूनी स्पष्टता की दिशा में बड़ा सुधार साबित हो सकता है। अब सबकी नजर मानसून सत्र पर है, जहां तय होगा कि मध्य प्रदेश उत्तराखंड के बाद यूसीसी लागू करने वाला अगला राज्य बनता है या नहीं।







