देश में NEET समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं के कथित पेपर लीक मामलों को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि पेपर लीक के मामलों में दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे, ताकि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर तेजी से कार्रवाई हो सके।
हालांकि, प्रधानमंत्री के इस ऐलान के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि देश के शिक्षा तंत्र को कमजोर करने और युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों का भरोसा तोड़ा है और सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए। वहीं, विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों की ओर से भी तीन प्रमुख मांगें सामने आई हैं। छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने, जिम्मेदार अधिकारियों को हटाने और प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाने के लिए कानूनी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई नए कदम भी उठाए जाएंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन युवाओं का विश्वास वापस दिला पाएगा, या फिर विपक्ष के आरोपों के बीच शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होगा। आने वाले दिनों में सरकार के कदम और विपक्ष की रणनीति, दोनों पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी।







