मध्य प्रदेश में करीब 150 करोड़ रुपये की जमीन के कथित सौदे को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। करोड़ों की संपत्ति जुटाने के आरोपों से घिरे हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान से जुड़े इस मामले में अब एक नया वीडियो सामने आया है, जिसने पूरे प्रकरण को फिर चर्चा में ला दिया है।
यह मामला इंदौर के पास मगरखेड़ी की कस्तूरीबाई से जुड़ा है, जिनकी पारिवारिक जमीन का करीब 150 करोड़ रुपये में सौदा किए जाने की बात सामने आई थी। इस जमीन सौदे में हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान को गवाह बताया जा रहा है।
अब इस मामले में सामने आए नए वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि जब कस्तूरीबाई की तबीयत बिगड़ी और उन्हें इंदौर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब उनके परिवार के लोगों को उनसे मिलने से रोकने की व्यवस्था की गई थी।
आरोप है कि अस्पताल में कस्तूरीबाई के इलाज के दौरान उनके परिजनों को उनसे मिलने से रोकने के लिए लिखित सूचना दी गई थी। इस कथित सूचना में महिला से किसी को मिलने नहीं देने की बात सामने आने का दावा किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कस्तूरीबाई से उनके परिजनों को मिलने से रोकने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह फैसला उनकी सुरक्षा और इलाज से जुड़ा था, या इसके पीछे कोई दूसरी वजह थी? इन सवालों का जवाब जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान से ही स्पष्ट हो सकेगा।
करीब 150 करोड़ रुपये की जमीन का कथित सौदा, एक पुलिसकर्मी का गवाह के रूप में नाम और अब अस्पताल में महिला से मुलाकात रोकने के आरोप—इन तमाम पहलुओं ने मामले को गंभीर बना दिया है।
हालांकि, वीडियो से जुड़े दावों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी जरूरी है। जब तक जांच में तथ्य स्पष्ट नहीं होते, किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस पूरे मामले में जांच एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं और कस्तूरीबाई से जुड़े जमीन सौदे की असलियत क्या सामने आती है।
फिलहाल, इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है—150 करोड़ की जमीन के सौदे में आखिर क्या हुआ था, और अस्पताल में कस्तूरीबाई से परिजनों को मिलने से रोकने के पीछे की वास्तविक वजह क्या थी?






