नर्मदापुरम से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जिसने न्याय व्यवस्था की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मॉब लिंचिंग केस में 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाने वाली एडीजे तबस्सुम खान को सोशल मीडिया पर खुलेआम जान से मारने की धमकी दी गई है।
वायरल वीडियो में एक युवक कहता दिखाई दे रहा है कि अगर 10 दिनों के भीतर हमारे सभी हिंदू भाइयों को रिहा नहीं किया गया, तो देश और प्रदेश में कत्लेआम होगा। वहीं एक दूसरे वीडियो में एक महिला जज पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें धमकी देती नजर आ रही है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
मामले के सामने आने के बाद गृह मंत्रालय की साइबर सेल ने संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट पर आईटी एक्ट के तहत नोटिस जारी किया है। वहीं सिवनी मालवा पुलिस ने दो अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वीडियो किसने बनाया और इसे किस उद्देश्य से वायरल किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम पर सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि नफरत फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की बजाय केवल औपचारिक कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं इस मामले ने न्यायाधीशों की सुरक्षा, सोशल मीडिया पर बढ़ती धमकियों और कानून के सम्मान को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है कि धमकी देने वालों तक कानून कितनी जल्दी पहुंचता है और न्यायपालिका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।







