मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच आमतौर पर सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है। इतिहास गवाह है कि जब भी दुनिया में युद्ध या बड़ा भू-राजनीतिक संकट आया, निवेशकों ने सोने की ओर रुख किया और कीमतें तेजी से बढ़ीं। लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग दिख रही है। ईरान से जुड़े तनाव के दौरान सोने की कीमतों में करीब ₹12,000 की गिरावट ने बाजार को चौंका दिया है।
इस गिरावट के पीछे कई वजहें सामने आ रही हैं। सबसे बड़ा कारण है डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख। जब निवेशकों को बेहतर रिटर्न बॉन्ड या डॉलर में दिखता है, तो वे सोने से पैसा निकाल लेते हैं। इसके अलावा, कुछ बड़े निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली भी इस गिरावट की अहम वजह मानी जा रही है। यानी डर के माहौल में भी इस बार सोना उम्मीद के मुताबिक नहीं भागा, बल्कि दबाव में आ गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के नीचे जा सकता है? एक्सपर्ट्स का मानना है कि शॉर्ट टर्म में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अगर डॉलर मजबूत बना रहता है और ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो सोने पर दबाव बना रह सकता है और कीमतें और नीचे फिसल सकती हैं।
हालांकि लंबी अवधि की बात करें तो सोना अभी भी एक मजबूत निवेश विकल्प बना हुआ है। अनिश्चितता, महंगाई और वैश्विक तनाव जैसे कारक इसे फिर से ऊपर ले जा सकते हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए सलाह यह है कि एकमुश्त बड़ी खरीदारी करने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करें। अगर कीमतें और गिरती हैं, तो यह खरीदारी का अच्छा मौका बन सकता है।
फिलहाल बाजार को समझना और जल्दबाजी से बचना ही समझदारी होगी, क्योंकि सोना भले ही अभी कमजोर दिख रहा हो, लेकिन इसकी चमक पूरी तरह फीकी नहीं पड़ी है।







