35 दिनों तक चले आंदोलन, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, संसद मार्च, लाठीचार्ज और लगातार बढ़ते दबाव के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है। लेकिन पार्टी का कहना है कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सिर्फ पहली सीढ़ी है। उनका दावा है कि जिस तरह कॉकरोच एक बार किसी जगह घुस जाए तो आसानी से बाहर नहीं निकलता, उसी तरह उनकी पार्टी भी अपने अभियान को बीच में नहीं छोड़ेगी।
दैनिक भास्कर से बातचीत में पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष राकां और सौरव दास ने कहा कि अब अगला लक्ष्य उन पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय कराना है, जिन पर प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती और लाठीचार्ज के आरोप लगे हैं। उनका कहना है कि सिर्फ राजनीतिक जिम्मेदारी तय करना काफी नहीं है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
CJP का दावा है कि 35 दिनों तक चले आंदोलन में हजारों लोगों का समर्थन मिला और लगातार दबाव बनने के बाद सरकार को बड़ा फैसला लेना पड़ा। पार्टी ने यह भी संकेत दिए हैं कि अगर उनकी बाकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो देशभर में नया आंदोलन शुरू किया जाएगा।
हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार आगे और कदम उठाती है या फिर CJP अपने अगले चरण के आंदोलन की शुरुआत करती है।
फिलहाल इतना तय है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस विवाद का अंत नहीं, बल्कि एक नए राजनीतिक और कानूनी संघर्ष की शुरुआत बनता नजर आ रहा है।







