दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को अब अंतिम और सबसे अहम चरण में पहुंचा दिया है। पार्टी ने इस बार सिर्फ बड़े नेताओं की सभाओं पर ही नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक मजबूत संगठन खड़ा करने की रणनीति अपनाई है। यही वजह है कि हर शक्ति केंद्र पर दो अनुभवी नेताओं की जिम्मेदारी तय कर दी गई है, ताकि चुनाव प्रचार से लेकर कार्यकर्ताओं के समन्वय और मतदान दिवस तक हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा सके।
बीजेपी की योजना के तहत पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, वरिष्ठ संगठन पदाधिकारी और अनुभवी कार्यकर्ताओं को अलग-अलग शक्ति केंद्रों की कमान सौंपी गई है। प्रत्येक शक्ति केंद्र में एक प्रभारी और एक संगठक नियुक्त किया गया है। एक शक्ति केंद्र के अंतर्गत चार से छह बूथ शामिल किए गए हैं, यानी औसतन पांच बूथों की जिम्मेदारी दो दिग्गज नेताओं के हाथों में होगी। इन नेताओं का काम बूथ समितियों को सक्रिय रखना, कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क बनाए रखना और चुनावी अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाना होगा।
जिला भाजपा की ओर से जारी सूची में दतिया नगर, दतिया ग्रामीण, बड़ौनी, भांडेर, इंदरगढ़ और सेंवढ़ा मंडलों के शक्ति केंद्रों के लिए प्रभारी और संगठकों की नियुक्ति की गई है। पार्टी का मानना है कि वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और संगठनात्मक कौशल का सीधा फायदा चुनावी अभियान को मिलेगा और बूथ प्रबंधन पहले से अधिक मजबूत होगा।
वहीं, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को भी अलग-अलग जिम्मेदारियां देकर प्रचार अभियान को धार देने की तैयारी की गई है। साफ है कि बीजेपी इस उपचुनाव में कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है और बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुकी है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि बीजेपी की यह माइक्रो मैनेजमेंट रणनीति दतिया उपचुनाव में कितना असर दिखाती है।







