अमेरिका और इजराइल की ईरान से बढ़ती जंग का असर अब सीधे मध्यप्रदेश की सड़कों और रसोइयों में दिखने लगा है। हॉर्मुज जलमार्ग पर गैस सप्लाई ठप हुई तो भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर गायब हो गए।
हालत ये है कि होटल-रेस्टोरेंट चलाने वालों से लेकर ठेले पर खाना बेचने वाले छोटे कारोबारियों तक सबके चूल्हे ठंडे पड़ने लगे हैं। जिन लोगों का रोज का धंधा गैस सिलेंडर पर टिका था, वो अब इधर-उधर भटककर सिलेंडर ढूंढ रहे हैं।
सबसे ज्यादा चिंता शादी के सीजन की है। प्रदेश में करीब 50 हजार शादियों का अनुमान है और हजारों परिवारों ने कार्ड तक बांट दिए हैं। लेकिन अब सवाल ये है कि दावत में खाना बनेगा भी या नहीं?
क्योंकि कॉमर्शियल सिलेंडर मिलना लगभग बंद हो गया है। खुले में भट्टी जलाने की कोशिश करो तो प्रशासन 10 हजार रुपए तक का जुर्माना ठोकने को तैयार बैठा है। यानी हालात ऐसे हैं कि जंग कहीं और हो रही है और सजा यहां के छोटे कारोबारियों को मिल रही है।
भोपाल के कैटरिंग कारोबारी जितेंद्र पिछले 12-15 साल से इस काम में हैं। उनका कहना है कि अभी तो रोज इवेंट हैं आज, कल और परसों भी। 14 तारीख तक खरमास चल रहा है, उससे पहले भी कई कार्यक्रम हैं।
लेकिन अगर कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिले तो कैटरिंग का पूरा कारोबार ठप हो सकता है। अभी तो किसी तरह घर के सिलेंडर से और जान-पहचान से काम चलाया जा रहा है, मगर ये जुगाड़ ज्यादा दिन नहीं चलेगा। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि जो सिलेंडर कहीं मिल भी रहा है, उसकी कीमत 2200 रुपए तक पहुंच गई है। और वो भी तुरंत नहीं, एक-दो दिन बाद मिलने की बात कही जा रही है।
उधर जिन परिवारों की शादी है, उनके फोन कैटरिंग वालों के पास लगातार आ रहे हैं। हर कोई एक ही सवाल पूछ रहा है “भाई खाना बनेगा तो ना?” अगर इवेंट कैंसिल हुए तो सिर्फ कैटरिंग वालों का नहीं, बल्कि टेंट, बर्तन, हलवाई, मजदूर और छोटे सप्लायरों तक का बड़ा नुकसान होगा। कड़वी सच्चाई ये है कि बड़े देशों की ताकत दिखाने की जंग का सबसे बड़ा झटका हमेशा आम लोगों को ही लगता है।
और इस बार भी वही हो रहा है वॉशिंगटन और तेल अवीव में फैसले हो रहे हैं, तेहरान में जवाब दिए जा रहे हैं, लेकिन भोपाल और इंदौर में लोगों की रोटियां ठंडी पड़ रही हैं। जंग की आग हजारों किलोमीटर दूर भले जल रही हो, लेकिन उसकी गर्मी अब मध्यप्रदेश के कारोबारियों की जेब और रसोई दोनों को झुलसा रही है।







