“प्रेमिका को वापस लाना है तो 1 लाख… और अगर रास्ते में उसकी मां आ रही है, तो 5 लाख में उसे भी ‘हटा’ देंगे…”
ये कोई फिल्मी डायलॉग नहीं, ये है उस अंधेरे बाज़ार की असली आवाज़ जहां इंसानियत की कीमत तय होती है, और भावनाओं को हथियार बनाकर लोगों को लूटा जाता है।
एक तरफ प्यार में टूटा हुआ इंसान, दूसरी तरफ खुद को ‘नागा साधु’ बताने वाला ढोंगी तांत्रिक और बीच में डर, लालच और अंधविश्वास का ऐसा जाल, जिसमें फंसकर लोग न सिर्फ पैसा गंवा रहे हैं, बल्कि अपराध की तरफ भी धकेले जा रहे हैं।
3 दिन में काम खत्म… “मौत नेचुरल लगेगी… पुलिस का कोई झंझट नहीं…” ये शब्द सिर्फ डरावने नहीं हैं, ये सीधे-सीधे कानून और इंसानियत को चुनौती हैं। सवाल ये है क्या सच में कोई तंत्र-मंत्र किसी की जान ले सकता है? या ये सिर्फ बेवकूफ बनाने का खेल है?मध्यप्रदेश से लेकर राजस्थान तक कथित आश्रम, दरगाहें और सोशल मीडिया पर बैठे ये ‘चमत्कारी बाबा’ दरअसल एक संगठित गैंग की तरह काम कर रहे हैं। इनका तरीका बेहद चालाक है पहले आपकी कमजोरी पकड़ो… प्यार, डर, बदला या लालच… फिर उसी पर खेल खेलो।
“खोया प्यार वापस मिलेगा…”
“दुश्मन हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा…”
“कोई सबूत नहीं बचेगा…”
ऐसे बड़े-बड़े वादे, और फिर शुरू होता है वसूली का खेल। लाखों रुपये ऐंठे जाते हैं, और बदले में मिलता है सिर्फ धोखा।
सबसे खतरनाक बात ये है कि ये लोग न सिर्फ लोगों को ठग रहे हैं, बल्कि उन्हें अपराध के लिए उकसा भी रहे हैं।
किसी को “मारण क्रिया” के नाम पर डराया जाता है, तो किसी को खुद ही अपराध करने के लिए भड़काया जाता है।
ये सिर्फ ठगी नहीं ये समाज के लिए एक जहर है। अब सवाल आपसे क्या आप अपने दर्द का इलाज अंधविश्वास से करेंगे?
या सच का सामना करके इस धोखे के खिलाफ खड़े होंगे? क्योंकि याद रखिए जहां तंत्र-मंत्र के नाम पर जान लेने की बात हो, वहां ‘चमत्कार’ नहीं… सिर्फ अपराध होता है।







