दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP का आंदोलन अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां हर पल नई हलचल देखने को मिल रही है। आंदोलन का आज 33वां दिन है और जंतर-मंतर पर सुबह से ही हजारों प्रदर्शनकारी जुटने लगे। इनमें वे लोग भी शामिल हैं, जो 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान पुलिस की लाठीचार्ज और आंसू गैस की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। बढ़ती भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए राजधानी के 16 मेट्रो स्टेशनों को एहतियातन बंद कर दिया गया, जबकि पूरे इलाके में भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक जवानों की तैनाती की गई है।
इसी बीच आंदोलन को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। सरकार ने दूसरी बार बातचीत का प्रस्ताव भेजा है। CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि सरकार की ओर से बातचीत का संदेश मिला है, लेकिन अंतिम फैसला संगठन की कोर टीम की बैठक के बाद ही लिया जाएगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह बातचीत आंदोलन का समाधान निकाल पाएगी या फिर प्रदर्शन और तेज होगा।
दूसरी ओर, संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग थानों में कुल 10 एफआईआर दर्ज की हैं। प्रदर्शनकारियों पर रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों पर जानलेवा हमला करने, पथराव, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार देर रात गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में सोनम वांगचुक से मुलाकात की। वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता में भर्ती कराया गया था।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और आंदोलनकारियों के बीच प्रस्तावित बातचीत से कोई सकारात्मक रास्ता निकलेगा, या फिर राजधानी में सियासी और सामाजिक तनाव आने वाले दिनों में और बढ़ने वाला है।







