मध्य पूर्व से इस वक्त एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान पर जबरदस्त एयरस्ट्राइक की है। लेकिन इस बार हमले की सबसे बड़ी वजह बना चाबहार पोर्ट, जिस पर भारत ने अरबों रुपये का निवेश किया है। अमेरिकी हमले में चाबहार पोर्ट के कंट्रोल टावर को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिससे पूरे क्षेत्र में हलचल मच गई है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने खुद कंट्रोल टावर के क्षतिग्रस्त होने की तस्वीर साझा की है। वहीं ईरान की मेहर समाचार एजेंसी ने भी इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि पिछले एक सप्ताह में इसी कंट्रोल टावर पर यह तीसरा हमला है। लगातार हो रहे हमलों ने इस रणनीतिक बंदरगाह की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के मुताबिक इस ऑपरेशन में फाइटर जेट, ड्रोन और युद्धपोतों का इस्तेमाल किया गया। हमलों का निशाना तटीय निगरानी केंद्र, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और समुद्री सैन्य ठिकाने रहे। अमेरिका का दावा है कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई।
सबसे अहम बात यह है कि चाबहार पोर्ट भारत के लिए सिर्फ एक बंदरगाह नहीं बल्कि रणनीतिक जीवनरेखा माना जाता है। भारत की सरकारी कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड इस पोर्ट का संचालन करती है। यही बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी व्यापारिक पहुंच देता है।
अब सवाल यह है कि क्या चाबहार पर हुए इस हमले का असर भारत के व्यापार और रणनीतिक हितों पर पड़ेगा? क्या मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव नई भू-राजनीतिक चुनौती बन सकता है? दुनिया की नजरें अब इसी पर टिकी हुई हैं।







