रीवा के संजय गांधी अस्पताल से इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। सरकारी शिक्षक अनिल कुमार तिवारी ICU में जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं, जबकि उनका परिवार 45 डिग्री की भीषण गर्मी में पिछले 48 घंटे से अस्पताल के बाहर भूखा-प्यासा बैठा है। सबसे बड़ा सवाल ये है कि घटना के 72 घंटे बाद भी आखिर आरोपियों पर FIR क्यों नहीं हुई?
पीड़ित परिवार का आरोप है कि विश्वविद्यालय थाना प्रभारी और एक पत्रकार की भूमिका पूरे मामले में संदिग्ध है, लेकिन पुलिस अब तक कार्रवाई से बचती नजर आ रही है। परिवार का कहना है कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला तो वे सामूहिक आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे।
शिक्षक के भाई धीरेंद्र तिवारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि निशांत नाम का युवक खुद को रसूखदार बताकर धमकाता था। उसका कहना था कि टीआई हितेंद्रनाथ शर्मा उसके रिश्तेदार हैं और एसपी गुरकरण सिंह उसके बैचमेट। धीरेंद्र के मुताबिक, निशांत ने उनके भाई को अपमानित करते हुए कहा था “मेरे जूते पर नाक रगड़ो, तभी माफ करूंगा।”
अब सवाल ये है कि क्या कानून सिर्फ रसूख वालों के लिए है? क्या एक शिक्षक का परिवार न्याय के लिए यूं ही अस्पताल के बाहर तड़पता रहेगा? रीवा में उठ रहे ये सवाल अब पुलिस प्रशासन की साख पर सीधा हमला बन चुके हैं।




