स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के तहत जिन डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, वे अगले साल होने वाले नगर निगम और पंचायत चुनावों में फिर भी वोट डाल सकते हैं। इसकी बड़ी वजह भारत निर्वाचन आयोग यानी ECI और राज्य निर्वाचन आयोग यानी SEC के बीच बढ़ता विवाद माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने नई मतदाता सूची मांगी थी, ताकि 15 जिलों में होने वाले निकाय उपचुनाव और अगले साल के पंचायत व नगरीय चुनाव उसी अपडेटेड सूची के आधार पर कराए जा सकें। लेकिन केंद्रीय निर्वाचन आयोग की तरफ से यह सूची उपलब्ध नहीं कराई गई।
सूत्रों के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग ने इस मामले में पांच बार पत्र भेजे, लेकिन हर बार इंतजार ही हाथ लगा। इसके बाद राज्य आयोग ने अपनी अलग वोटर लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर दोनों आयोगों की मतदाता सूची अलग-अलग रही, तो जिन वोटरों के नाम ECI की सूची से हट चुके हैं, वे SEC की सूची में बने रह सकते हैं। ऐसे में एक ही मतदाता अलग चुनावों में अलग स्थिति में नजर आ सकता है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इससे चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो सकते हैं। वहीं विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधने की तैयारी में हैं।
फिलहाल नजर इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों आयोग किसी साझा समाधान पर पहुंचते हैं या फिर आने वाले स्थानीय चुनाव अलग-अलग वोटर लिस्ट के आधार पर कराए जाएंगे।




