मध्यप्रदेश के दतिया से एक अहम और सख्त संदेश देने वाला फैसला सामने आया है, जहां अदालत ने झूठा रेप और एससी/एसटी एक्ट का मामला दर्ज कराने वाली महिला को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
मामला दतिया जिले के बड़ोनी थाना क्षेत्र का है। यहां रहने वाली वैभवी सनोरिया ने 22 सितंबर 2021 की रात अपने पड़ोसी कालीचरण पर घर में घुसकर दुष्कर्म करने और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दुष्कर्म और एससी/एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया और चालान विशेष न्यायालय में पेश किया।
लेकिन सुनवाई के दौरान इस केस में बड़ा मोड़ आया। अदालत में बयान देते हुए खुद फरियादिया वैभवी सनोरिया अपने आरोपों से मुकर गई। उसने स्वीकार किया कि पैसों के लेनदेन के विवाद के चलते उसने कालीचरण के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया था।
इसके बाद अदालत ने कालीचरण को बरी कर दिया और वैभवी के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराने के निर्देश दिए। मामले में पांच गवाहों के बयान और अंतिम बहस के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश भंडारी की अदालत ने वैभवी को दोषी ठहराया।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट टिप्पणी की कि इस तरह के झूठे मामलों की बढ़ती प्रवृत्ति न केवल न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करती है, बल्कि समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास भी पैदा करती है। ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई आवश्यक है ताकि कानून का दुरुपयोग रोका जा सके।
इस फैसले को एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, जो यह बताता है कि कानून का गलत इस्तेमाल करने वालों को भी अब कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा।







