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क्रिकेट सिखाने का ढोंग, ठगी करने का धंधा, लोन दिलाने के नाम पर चलता रहा जेब काटने का खेल

नरसिंहपुर में बच्चों को क्रिकेट सिखाने का दावा करने वाला एक शख्स आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया, लेकिन उसकी असली “कोचिंग” मैदान में नहीं बल्कि लोगों को ठगने की थी। नरसिंहपुर पुलिस ने दिल्ली से ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है जो मासूम और जरूरतमंद लोगों को लोन दिलाने का झांसा देकर हजारों रुपये ऐंठ रहा था।

गिरफ्तार आरोपी का नाम देवकीनंदन कपूर उर्फ देव (35) है, जो दिल्ली के जैन नगर, कराला इलाके का रहने वाला है। खुद को प्रोफेशनल क्रिकेट खिलाड़ी और बच्चों का कोच बताने वाला यह व्यक्ति असल में अंतरराज्यीय ठगी गिरोह का मास्टरमाइंड निकला। पुलिस के मुताबिक वह लोगों का भरोसा जीतने के लिए क्रिकेटर और कोच होने का नाटक करता था और फिर धीरे-धीरे उन्हें अपने जाल में फंसा लेता था।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब नरसिंहपुर निवासी ओंकार प्रसाद चौधरी ने 2 फरवरी 2026 को शिकायत दर्ज कराई। ओंकार ने बताया कि लोन दिलाने का भरोसा देकर उनसे 93 हजार 900 रुपये की ठगी कर ली गई। शिकायत के बाद पुलिस ने मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ट्रांजेक्शन की तकनीकी जांच शुरू की और आखिरकार आरोपी तक पहुंच गई।

पोस्टर से शुरू होता था ठगी का खेल
जांच में सामने आया कि आरोपी ने रेलवे स्टेशन समेत कई सार्वजनिक जगहों की दीवारों पर फर्जी बैंक और फाइनेंस कंपनियों के नाम के पोस्टर चिपकवा रखे थे। पोस्टर देखकर जब कोई जरूरतमंद व्यक्ति दिए गए नंबर पर कॉल करता, तो कॉल सेंटर से एक महिला खुद को बैंक से जुड़ा बताकर उसे दूसरे नंबर पर बात करने के लिए कहती।

इसके बाद “अमेर पवार” नाम का शख्स फोन उठाता और बड़े आत्मविश्वास से लोन मंजूर कराने का झांसा देता। आधार कार्ड, पैन कार्ड, समग्र आईडी और बैंक पासबुक की कॉपी व्हाट्सएप पर मंगवाई जाती और फिर शुरू होता असली खेल बीमा, जीएसटी, डीडी, खाता परिवर्तन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर लगातार पैसे ऐंठने का सिलसिला।

गरीब और जरूरतमंद लोग लोन की उम्मीद में एक-एक करके पैसे भेजते रहते और ठगों की जेब भरती रहती। जब पीड़ित को शक होता, तो उसे भोपाल बुलाकर अलग-अलग जगहों पर घुमाया जाता ताकि वह आरोपी से सीधे मिल ही न सके।

कॉल सेंटर से चल रहा था ठगी का धंधा
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी दिल्ली में कॉल सेंटर चलाता था। वहीं से लोगों को फोन कर ठगी की स्क्रिप्ट पढ़ाई जाती थी। कॉल सेंटर में बिहार की एक युवती को टेली-कॉलर के तौर पर रखा गया था, जिसका काम सिर्फ लोन के नाम पर लोगों से बातचीत करना था। कई महीनों तक वेतन नहीं मिलने पर उसे भी शक हुआ और वह नौकरी छोड़कर चली गई।

सबसे चालाक चाल यह थी कि ठगी का पैसा आरोपी सीधे अपने खाते में नहीं लेता था। इसके लिए वह दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करता था ताकि पुलिस को पकड़ने में मुश्किल हो। हालांकि तकनीकी जांच के जरिए पुलिस ने ऐसे 10 बैंक खातों को चिन्हित कर उन्हें जब्त कर लिया है।

पुलिस ने आरोपी के पास से 10 चेकबुक, 10 पासबुक, सात एटीएम कार्ड और दो आधार कार्ड सहित कई दस्तावेज बरामद किए हैं। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

सवाल यह है कि आखिर कितने लोग ऐसे पोस्टरों और फर्जी वादों के झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा चुके होंगे। लोन के नाम पर चल रहा यह खेल बताता है कि ठग अब कितने शातिर और तकनीकी हो चुके हैं और जरूरतमंद लोगों की मजबूरी को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बना रहे हैं।

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