मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। जंग के 17वें दिन सोमवार सुबह दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक फ्यूल टैंक को निशाना बनाकर हमला किया गया। धमाके के बाद इलाके में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया और एहतियातन कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को दूसरे एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट करना पड़ा।
जानकारी के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब जंग के दौरान दुबई के आसपास हमले की खबर आई हो। इससे पहले भी इसी संघर्ष के दौरान यहां सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया था। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट दुनिया के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट्स में गिना जाता है, ऐसे में इस हमले ने वैश्विक एयर ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में हमलों की यह श्रृंखला जारी रहती है तो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, तेल सप्लाई और व्यापारिक मार्गों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
दूसरी ओर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने NATO देशों को कड़ा संदेश दिया है। ट्रम्प ने कहा कि अगर सहयोगी देश होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने में अमेरिका की मदद नहीं करते हैं तो NATO का भविष्य बहुत खराब हो सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने कई मौकों पर अपने सहयोगियों की मदद की है, अब समय है कि वे भी अमेरिका के साथ खड़े हों।
ट्रम्प ने खासतौर पर उन देशों से वॉरशिप और सैन्य मदद भेजने की मांग की है जो होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल करते हैं। दरअसल दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है, इसलिए इसकी सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम मानी जाती है।
ईरान ने दागी ‘सेजिल’ बैलिस्टिक मिसाइल, 2500 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता
जंग के बीच ईरान ने इजराइल पर अपनी ताकत का बड़ा प्रदर्शन किया है। ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने दावा किया है कि उसने इजराइल की सैन्य और डिफेंस फैसिलिटीज को निशाना बनाते हुए ‘सेजिल’ बैलिस्टिक मिसाइल दागी है।
सेजिल मिसाइल सॉलिड फ्यूल से चलने वाली एक स्ट्रैटेजिक बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता करीब 2000 से 2500 किलोमीटर तक बताई जाती है। यह मिसाइल लंबी दूरी तक तेज गति से हमला करने में सक्षम मानी जाती है और इसे ईरान के सबसे उन्नत हथियारों में गिना जाता है।
रक्षा मामलों की पत्रिका ‘द नेशनल इंटरेस्ट’ के अनुसार, इस मिसाइल की रेंज इतनी लंबी है कि यह मिस्र, सूडान के कुछ हिस्सों, यूक्रेन के बड़े क्षेत्र, दक्षिणी रूस, पश्चिमी चीन और भारत तक पहुंच सकती है। इसके अलावा हिंद महासागर और भूमध्य सागर के बड़े हिस्से भी इसकी रेंज में आते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस तरह की लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल बढ़ता है तो मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा संकट का रूप ले सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस जंग पर टिकी हुई है और आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह देखना बेहद अहम होगा।







