2000 का सिलेंडर 4000 में! देशभर में LPG का हाहाकार, लोग पूछ रहे, सरकार सो रही है क्या?
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध का असर अब सीधे आम भारतीय की रसोई पर पड़ने लगा है। देशभर में LPG सिलेंडर की ऐसी किल्लत हो गई है कि गैस एजेंसियों के बाहर सुबह 5 बजे से ही लोगों की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई शहरों में सिलेंडर के लिए लोगों की पुलिस से झड़प तक हो रही है। गैस एजेंसियों के बाहर धक्का-मुक्की, गुस्सा और बेबसी यही तस्वीर आज देश के कई हिस्सों से सामने आ रही है।
इस संकट के बीच कालाबाजारी करने वालों की चांदी हो गई है। ₹2000 का कॉमर्शियल सिलेंडर खुलेआम ₹4000 में बेचा जा रहा है। यानी जनता की मजबूरी को कुछ लोग धंधा बना चुके हैं और सिस्टम कहीं दिखाई नहीं दे रहा। पंजाब में तो हालात इतने बिगड़ गए कि लोग सिलेंडर लेकर भागते नजर आए। वहीं केरल में गैस की कमी से करीब 40 प्रतिशत रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। होटल और ढाबों में गैस का स्टॉक खत्म हो चुका है, कारोबार ठप पड़ रहा है और कई जगहों पर ताले लटकने लगे हैं।
राजस्थान के कोटा समेत कई शहरों में हॉस्टल मेस और ढाबों में मजबूरी में लकड़ी, कोयले और इलेक्ट्रिक चूल्हों पर खाना बनाना पड़ रहा है। यानी 21वीं सदी में भारत की रसोई फिर से पुराने दौर में लौटती नजर आ रही है।
दिल्ली में इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हुआ। वहीं जयपुर में कांग्रेस ने विरोध जताने के लिए LPG सिलेंडर की प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली मानो गैस सप्लाई सिस्टम की मौत हो गई हो। सबसे बड़ा सवाल यही है… जब देशभर में रसोई ठंडी पड़ रही है, व्यापार बंद हो रहा है, लोग लाइन में खड़े-खड़े परेशान हो रहे हैं… तब जिम्मेदार लोग आखिर कहां हैं? क्या सरकार के पास इस संकट का कोई प्लान है… या फिर आम जनता को ऐसे ही महंगाई, कालाबाजारी और किल्लत के बीच जूझते रहना पड़ेगा? क्योंकि फिलहाल तो तस्वीर साफ है रसोई में आग बुझ रही है… और जनता का गुस्सा भड़क रहा है।







