राजवाड़ा की ऐतिहासिक गेर में उड़ेगा रंगों का आसमान, टेसू के गुलाल से बनेगा तिरंगा
इंदौर में रंगपंचमी का रंगोत्सव शुरू हो चुका है और इस बार भी परंपरा के मुताबिक टोरी कॉर्नर की गेर ने उत्सव की शुरुआत कर दी है। यह टोली हर साल की तरह इस बार भी रंगपंचमी की पारंपरिक गेर में सबसे आगे रहेगी। गेर के साथ फागयात्रा भी निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होकर इस उत्सव की रौनक बढ़ाएंगी।
राजवाड़ा से निकलने वाली गेर की परंपरा करीब सात दशक पुरानी है। शुरुआती दौर में यहां बड़े कड़ावों में रंग भरकर लोगों को रंगों से सराबोर किया जाता था। समय के साथ यह आयोजन लगातार भव्य होता गया और अब इसमें बैलगाड़ियों, ट्रैक्टरों, डीजे और आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल होने लगा है।
पिछले तीन वर्षों से इस गेर में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 5 लाख से अधिक रही है, जिसके चलते यह आयोजन देश के सबसे बड़े रंगोत्सवों में शुमार हो गया है। दूर-दूर से लोग इस अनोखे उत्सव को देखने और इसमें शामिल होने के लिए इंदौर पहुंचते हैं।
हर साल की तरह इस बार भी राजवाड़ा और उससे जुड़े मार्गों पर करीब 6 किलोमीटर के दायरे में रंग-गुलाल और पानी की बौछारों से पूरा शहर रंगों में सराबोर नजर आएगा। इस बार 8 हजार किलो टेसू के फूलों से बने गुलाल से राजवाड़ा पर तिरंगा बनाया जाएगा, जो इस आयोजन का विशेष आकर्षण रहेगा।
इसके साथ ही मिसाइलों के जरिए करीब 200 फीट ऊंचाई तक रंग उड़ाया जाएगा, जिससे पूरा आसमान रंगों से भर जाएगा। बैंड, ढोल-ताशे, झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इस पारंपरिक गेर को और भी भव्य और यादगार बनाएंगी।
इंदौर की यह ऐतिहासिक गेर सिर्फ एक उत्सव नहीं बल्कि शहर की संस्कृति, परंपरा और उत्साह का प्रतीक बन चुकी है, जहां रंगों के साथ-साथ भाईचारे और उमंग का भी जश्न मनाया जाता है।







