दमोह में एक बार फिर सवाल खड़ा हो गया है क्या अब स्कूल भी बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं रहे? शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे दमोह के कोतवाली थाना क्षेत्र में ओजस्विनी स्कूल के बाहर जो हुआ, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। परीक्षा देकर बाहर निकले दसवीं के छात्र को उसी की क्लास के एक छात्र ने चाकू से हमला कर दिया।
घटना इतनी अचानक और खौफनाक थी कि मौके पर मौजूद छात्र कुछ समझ ही नहीं पाए। घायल छात्र को उसके साथी आनन-फानन में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
मृतक छात्र की पहचान 14 वर्षीय ऋषि अहिरवार, पिता कमलेश अहिरवार, निवासी इमलाई के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि ऋषि दसवीं कक्षा का छात्र था और शुक्रवार को ओजस्विनी स्कूल में बने परीक्षा केंद्र पर पेपर देने आया था। हिरदेपुर और इमलाई के छात्रों का यही परीक्षा केंद्र था।
पेपर खत्म हुआ, बच्चे बाहर निकले, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि स्कूल के गेट के बाहर ही खून बहने वाला है। आरोप है कि उसी क्लास के एक छात्र ने अचानक ऋषि पर चाकू से हमला कर दिया और मौके से फरार हो गया। घायल हालत में सड़क पर पड़े ऋषि को उसके दोस्तों ने उठाया और सीधे जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने उसे आईसीयू में भर्ती किया, लेकिन ज्यादा खून बह जाने के कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अब सवाल ये है कि क्या एक छात्र तीन दिन तक चाकू मारने की धमकी देता रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी? साथ पढ़ने वाले छात्रों ने पुलिस को बताया कि तीन दिन पहले क्लास के ही एक छात्र से ऋषि का विवाद हुआ था और उसी ने चाकू मारने की धमकी दी थी।
कोतवाली टीआई मनीष कुमार के मुताबिक सूचना मिली थी कि स्कूल के बच्चे को चाकू लगा है और उसकी हालत गंभीर है। वहीं सीएसपी एच आर पांडेय ने बताया कि छात्र का काफी खून बह गया था, जिसकी वजह से उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
फिलहाल पुलिस साथियों के बयान के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर एक स्कूली विवाद इतनी खतरनाक हिंसा में कैसे बदल गया। लेकिन बड़ा सवाल यही है जब बच्चे स्कूल में किताबों के बजाय चाकू लेकर पहुंचने लगें, तो आखिर जिम्मेदार कौन है? स्कूल, समाज या वो सिस्टम जो इन बढ़ती हिंसक मानसिकताओं को समय रहते पहचान नहीं पा रहा।







