मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को कूनो नेशनल पार्क में ऐतिहासिक पहल करते हुए कूनो नदी में 53 घड़ियाल शावकों और 25 कछुओं को छोड़ा। इस महत्वपूर्ण कदम के साथ कूनो देश का एकमात्र ऐसा राष्ट्रीय उद्यान बन गया है, जहां चीता, टाइगर, तेंदुआ और घड़ियाल एक साथ मौजूद हैं।
वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
मुरैना के देवरी प्रजनन केंद्र से लाए गए 53 घड़ियालों में 28 नर और 25 मादा शामिल हैं। इनके साथ थ्री स्ट्राइप्ड रूफ टर्टल प्रजाति के 25 कछुओं को भी विशेष निगरानी में नदी में छोड़ा गया। वन विभाग की टीम ने पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा और अनुकूलन प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया।
गौरतलब है कि यह कार्यक्रम पहले दो बार स्थगित हो चुका था, लेकिन अंततः इसे सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। इससे पहले वर्ष 2021 में भी यहां 50 घड़ियाल (10 नर और 40 मादा) छोड़े गए थे।
चीतों की संख्या बढ़कर 48
कूनो नेशनल पार्क में हाल ही में मादा चीता गामिनी द्वारा चार शावकों को जन्म देने से खुशी का माहौल है। इसके साथ ही बोत्सवाना से आए 9 नए चीतों के आगमन के बाद पार्क में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 48 हो गई है।
उल्लेखनीय है कि कूनो में चीता पुनर्वास परियोजना के तहत अफ्रीकी चीतों को बसाया गया था, जो देश में विलुप्त हो चुके थे। अब यहां उनकी संख्या और जैव विविधता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
जैव विविधता का अनोखा संगम
कूनो अब देश का इकलौता राष्ट्रीय उद्यान बन गया है, जहां एक साथ
- चीता
- बाघ
- तेंदुआ
- घड़ियाल
जैसे शीर्ष शिकारी प्रजातियां मौजूद हैं। यह उपलब्धि न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी सफलता मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि घड़ियाल और कछुओं की पुनर्स्थापना से कूनो नदी की पारिस्थितिकी और मजबूत होगी तथा जैव संतुलन को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
कुल मिलाकर, कूनो नेशनल पार्क अब भारत के वन्यजीव मानचित्र पर एक अनोखी और सशक्त पहचान बना चुका है।







