मध्य प्रदेश में शराब पीने वालों के लिए आने वाले दिन भारी पड़ सकते हैं। राज्य सरकार एक्साइज पॉलिसी 2026-27 में ऐसे बड़े बदलाव की तैयारी में है, जो सीधे शराब की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। वजह है राज्य पर बढ़ता कर्ज, केंद्र से मिलने वाले करों में कटौती और टैक्स सिस्टम में हालिया सख्ती।
सूत्रों के मुताबिक, नई एक्साइज पॉलिसी का मसौदा लगभग तैयार है और इसमें शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया को पूरी तरह बदलने का प्रस्ताव है। सरकार अब मौजूदा ठेकेदारी सिस्टम में जमी मोनोपॉली को तोड़ने, टैक्स कलेक्शन को ज्यादा सख्त और पारदर्शी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
असल दबाव राज्य की वित्तीय हालत से जुड़ा है। मध्य प्रदेश सरकार इस समय करीब 4.84 लाख करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबी है। ऊपर से केंद्र सरकार ने केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी घटा दी है। यही नहीं, टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स यानी टीसीएस को 1 फीसदी से बढ़ाकर 2 फीसदी कर दिया गया है, जिसका सीधा असर शराब कारोबार की लागत पर पड़ना तय माना जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि जब टैक्स का बोझ बढ़ेगा और नीलामी की शर्तें सख्त होंगी, तो ठेकेदार यह अतिरिक्त खर्च उपभोक्ताओं से वसूल सकते हैं। नतीजा शराब की कीमतों में बढ़ोतरी।
हालांकि सरकार का दावा है कि नई नीति से राजस्व बढ़ेगा और सिस्टम में फैली गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी। लेकिन सवाल यही है कि इस वित्तीय संकट का सबसे पहला असर आम लोगों की जेब पर तो नहीं पड़ेगा?
एक्साइज पॉलिसी 2026-27 का ऐलान होते ही तस्वीर और साफ होगी, लेकिन संकेत साफ हैं मध्य प्रदेश में शराब सस्ती रहने वाली नहीं है।







