सतना जिले के भरहुत गांव से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने एक पल को इंसानियत को शर्मसार किया, तो अगले ही पल उम्मीद और ममता की लौ जला दी। भरहुत के ऐतिहासिक पुरातत्व क्षेत्र में शनिवार की सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब जंगल की ख़ामोशी को चीरती एक नवजात की किलकारी सुनाई दी।
सुबह-सुबह खेलते हुए कुछ मासूम बच्चे पुरातत्व विभाग की बाउंड्रीवाल के भीतर पहुंचे। तभी उन्हें किसी रोने की आवाज़ सुनाई दी। पहले तो बच्चे सहम गए, लेकिन जब आवाज़ लगातार आती रही, तो उन्होंने हिम्मत जुटाई और तलाश शुरू की। थोड़ी ही दूर पर एक बोरे में कपड़े से लिपटा नवजात शिशु मिला। बच्चा ज़िंदा था, रो रहा था… और मदद की गुहार लगा रहा था।
कुछ बच्चे वहीं रुककर उसकी सुरक्षा में खड़े रहे, जबकि बाकी दौड़ते हुए गांव पहुंचे और बुजुर्गों को पूरी बात बताई। खबर मिलते ही गांव की सरपंच माया देवी ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचीं। दृश्य ऐसा था, जिसे देखकर हर आंख नम हो गई। नवजात को जन्म देने के बाद मां उसे जंगल में छोड़कर फरार हो चुकी थी।
सूचना मिलते ही उंचेहरा थाना पुलिस सक्रिय हुई। सहायक उपनिरीक्षक संतोष सिंह अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे और बच्चे को सुरक्षित निकालकर सिविल अस्पताल उंचेहरा पहुंचाया गया। अस्पताल में महिला चिकित्सक और विकासखंड चिकित्सा अधिकारी ने जांच के बाद बताया कि बच्चा पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ है।
डॉक्टरों के मुताबिक नवजात का जन्म अस्पताल लाए जाने से डेढ़ से दो घंटे पहले ही हुआ था। उसकी नाल तक नहीं कटी थी और शरीर पर गंदगी लगी हुई थी। समय रहते इलाज न मिलता, तो हालात बेहद गंभीर हो सकते थे। बच्चे का वजन करीब साढ़े तीन किलो है और उसे जन्म के तुरंत बाद दी जाने वाली फीडिंग भी कराई गई है। फिलहाल उसे एससीएनयू वार्ड में भर्ती कर जिला अस्पताल सतना रेफर किया गया है।
इस दिल दहला देने वाली घटना के बीच एक सुकून देने वाली तस्वीर भी सामने आई। सरपंच माया देवी की ममता जाग उठी। वे सुबह से ही नवजात की अपने बेटे की तरह देखभाल करती नजर आईं कभी उसे गोद में सुलातीं, कभी उसकी चिंता में डॉक्टरों से सवाल करतीं।
जहां एक मां का दिल पत्थर बन गया, वहीं गांव के बच्चों, ग्रामीणों और सरपंच की संवेदनशीलता ने साबित कर दिया कि इंसानियत अब भी ज़िंदा है। भरहुत की यह किलकारी सिर्फ एक बच्चे की नहीं थी, बल्कि समाज को झकझोरने वाली आवाज़ थी।







