देश की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब संत विमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर तीखा और चुनौतीपूर्ण बयान दे डाला। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ को अगले 40 दिनों के भीतर यह साबित करना होगा कि वे वास्तव में हिंदू हैं — केवल गेरुआ वस्त्र पहनना पर्याप्त नहीं है।
विमुक्तेश्वरानंद ने साफ शब्दों में मांग रखी कि अगर योगी सरकार गाय को “गोमाता” का संवैधानिक दर्जा नहीं देती, तो यह मान लिया जाएगा कि हिंदुत्व केवल दिखावे तक सीमित है। उनका कहना था कि गाय हिंदू आस्था की रीढ़ है, और अगर सत्ता में बैठा व्यक्ति भी इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाता, तो उसकी नीयत पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इस बयान के साथ ही साधु ने 40 दिनों की समय-सीमा तय कर दी, जिसे उन्होंने “धर्म की कसौटी” बताया। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि यह समय सिर्फ योगी के लिए नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक हिंदुत्व के लिए एक अग्निपरीक्षा है।
अब निगाहें योगी सरकार पर टिकी हैं। क्या यह चुनौती सिर्फ बयानबाज़ी बनकर रह जाएगी, या वाकई कोई बड़ा फैसला सामने आएगा? 40 दिनों की यह उलटी गिनती राजनीति और धर्म दोनों के समीकरण बदल सकती है।







