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सरकारी खजाने पर पांच साल तक चला खेल, अब ईडी ने कसा शिकंजा

मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल अलीराजपुर से सामने आए एक बड़े सरकारी घोटाले ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के इंदौर क्षेत्रीय कार्यालय ने 20 करोड़ 47 लाख रुपये के सरकारी धन गबन मामले में निर्णायक कार्रवाई करते हुए बड़ा खुलासा किया है। कट्ठीवाड़ा ब्लॉक शिक्षा कार्यालय से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में ईडी ने मुख्य आरोपी कमल राठौर सहित कुल 6 आरोपियों के खिलाफ विशेष पीएमएलए कोर्ट, इंदौर में अभियोजन शिकायत पेश कर दी है। कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर दिए हैं।

फर्जी बिलों से करोड़ों की निकासी, सिस्टम के भीतर रची गई साजिश

ईडी की जांच में सामने आया है कि अप्रैल 2018 से जुलाई 2023 के बीच इस घोटाले को बेहद योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया। शिक्षा विभाग के नाम पर संचालित विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए जारी बजट को फर्जी बिलों और दस्तावेजों के जरिए धीरे-धीरे ठिकाने लगाया गया। यह सारा खेल कट्ठीवाड़ा बीईओ कार्यालय के भीतर से संचालित हुआ, जहां सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये सरकारी खाते से बाहर निकाल लिए गए।

इस मामले की नींव पहले मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और चार्जशीट से पड़ी, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर गहन जांच शुरू की। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, परत-दर-परत चौंकाने वाले खुलासे सामने आते गए।

ईडी के अनुसार, मुख्य आरोपी कमल राठौर ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर करीब पांच साल तक इस गबन को अंजाम दिया। 7 अगस्त 2025 को ईडी ने कमल राठौर को गिरफ्तार किया था। इससे पहले की गई छापेमारी में 25 लाख रुपये नकद और कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए, जिन्होंने पूरे नेटवर्क की पोल खोल दी।

जांच में यह भी सामने आया कि गबन की गई रकम से आरोपियों ने कई अचल संपत्तियां खरीदी थीं। अब तक ईडी 4.3 करोड़ रुपये मूल्य की 14 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर चुकी है।

विशेष पीएमएलए कोर्ट, इंदौर ने ईडी की शिकायत को स्वीकार करते हुए सभी आरोपियों को पेश होने के निर्देश दिए हैं। ईडी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े नाम और नए खुलासे सामने आ सकते हैं।

सरकारी पैसों की लूट का यह मामला अब सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर जमी सड़ांध की बड़ी मिसाल बनता जा रहा है।

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